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 “जैसे समंदर में अंदर से उथलपुथल चलते रहती है पर सतह पे बिलकुक शांत दिखाई देता है, उसी तरह आपके अवचेतन मन में भी उथलपुथल चलते रहती है पर बाहर से शांत दिखाई देता है। अगर आपके अवचेतन मन में नकारात्मक उथलपुथल चल रही है तो आपक नकारात्मक जीवन जीते हो, अगर आपके मन में सकारात्मक उथलपुथल होती है तो आप सकारात्मक जीवन जीते हो। आकर्षण का सिद्धांत जो आपके अवचेतन मन में है वही आकर्षित करके देता है इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचे भले बाहेर की परिस्थिति कितनी भी नकारात्मक क्यों ना हो, एक चमत्कार से आपका जीवन बदल जायेगा।” अश्विनीकुमार
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 “जबरदस्ती से प्रयास करना छोड़ दे, प्रवाह के साथ बहते जाइये। आपको जो चाहिए वो आपके पंच इंद्रिय को महसूस होने दे और छोड़ दे, बाकी काम आकर्षण का सिद्धांत करेगा।” अश्विनीकुमार
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 “हर एक चीज पाहिले अवचेतन मन में निर्माण होती है उसके बात भौतिक जगत में प्रकट होती है। विचार वास्तव में निर्माण होते है।” अश्विनीकुमार
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 “जो आपके अवचेतन मन में निरंतर चालू रहता है वही आपके भौतिक जीवन में निर्माण होते रहता है बिलकुल वैसे ही।” अश्विनीकुमार
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 “असीमित उर्जा खुद में होने की भावना और स्वास्थ, तंदुरुस्ती और समृद्ध भावनाओं की अनुभूति ये सब एक ही फ्रिक्वेंसीपे काम करते है वो मतलब सकारात्मक, अच्छा अनुभव होने की भावनाओं की फ्रिक्वेंसी।” अश्विनीकुमार
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 “अगर आप थोड़ी कृतज्ञता करते हो तो आपके जीवन में थोडेसे सकारात्मक बदल होंगे पर अगर आप ज्यादा कृतज्ञता व्यक्त करते होंगे तो आपके जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव होंगे, चमत्कार होंगे और भाग्य जागृत होगा।” अश्विनीकुमार