“जैसे समंदर में अंदर से उथलपुथल चलते रहती है पर सतह पे बिलकुक शांत दिखाई देता है, उसी तरह आपके अवचेतन मन में भी उथलपुथल चलते रहती है पर बाहर से शांत दिखाई देता है। अगर आपके अवचेतन मन में नकारात्मक उथलपुथल चल रही है तो आपक नकारात्मक जीवन जीते हो, अगर आपके मन में सकारात्मक उथलपुथल होती है तो आप सकारात्मक जीवन जीते हो। आकर्षण का सिद्धांत जो आपके अवचेतन मन में है वही आकर्षित करके देता है इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचे भले बाहेर की परिस्थिति कितनी भी नकारात्मक क्यों ना हो, एक चमत्कार से आपका जीवन बदल जायेगा।” अश्विनीकुमार