“यदि आप समृद्ध और समृद्ध जीवन जीना चाहते हैं, तो कर्जा लेके घर ना लें, शिक्षा की लागत कम करें। इससे आपका पैसा और समय दोनों बचेगा। अब अपना बचा हुवा समय और पैसा मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक विकास और स्वास्थ्य पर खर्च करें। विभिन्न अनुभवों पर खर्च करें। आपको जो अनुभव मिला है, वह वेतन के रूप में आपको वापस मिलेगा। आप केवल एक ही नहीं, कई क्षेत्रों में अनुभव के साथ तयार होंगे। आप इनमें से किसी एक क्षेत्र को अपने करियर के लिए चुनेंगे और आप उसमें एक बड़ी छलांग लगाएंगे। शिक्षा को विभिन्न कोर्स से बदलें और शेष धन का उपयोग प्रात्यक्षिक के लिए करें। तुम ज्ञान और अनुभव के सागर बन जाओगे। आपके पास जीवन भर पर्याप्त समय और धन होगा। जीवन आसान है, इसे जटिल मत बनाओ।” अश्विनीकुमार
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Showing posts from May, 2022
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यदि आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और आप एक व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो पहले 2 वर्षों के लिए अपनी जीवन शैली और घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन अलग रखें। व्यवसाय शुरू करने के लिए कोई कर्जा न लें। आर्थिक मानसिकता बनाएं। अपनी भावनाओं पे नियंत्रण रखे। लालच, भय और जल्दबाजी पर काबू पाएं। परिवार के सदस्यों को समझाएं कि जरूरत पड़ने पे उनको उद्योग व्यवसाय सँभालने में मदत करनी पड़ेगी। निजी और व्यावसायिक जीवन को अलग रखें। अपनी जेब से पैसे निकालने से पहले दस बार सोचें, आमतौर पर आसानी से जाने ना दे। छुट्टियाँ न लें, द्योग व्यवसाय बंद ना रखे, ग्राहकों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहें। किसी भी सरकारी कर्मचारी, राजनीतिक पदाधिकारी और स्थानीय गुंडों को खुश करने की कोशिश करें, उन्हें नाराज ना करें। सिर में बर्फ और मुंह में चीनी आपको सफलता के शिखर पर ले जाएगी। अश्विनीकुमार
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“आपके पास ऊर्जा है, आपके पास क्षमता है, आपके पास अवचेतन, अचेत मन की शक्ति है, आपको उनका सही उपयोग करना आना चाहिए। यदि ऊर्जा एकाग्र करते हो तो आप कुंडलिनी जागृत करते हुए अपने जीवन में कई चमत्कार कर सकते हो। सही दिशा में उपयोग की जाने वाली क्षमताएं सभी समस्याओं को खत्म कर सकती हैं, आपदाओं को खत्म कर सकती हैं। यदि आप अंतर्ज्ञान की शक्ति का ठीक से उपयोग करते हैं, तो आप अभी सपने सच कर सकते हो।” अश्विनीकुमार
आजकल बीमारी का मुख्य कारण मानसिक है।
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कैंसर बढ़ा, हृदय रोग बढ़ा, किडनी खराब हुई, बीपी बढ़ा, मधुमेह बढ़ा और डिप्रेशन सामान्य हो गया। इसका मुख्य कारण क्या है? जो भी आता है वह बोलता है कि ये वो खाने से बीमारी हुवी, कुछ न मिले तो उंगली उठाइए। समस्या की जद गयी कहा? पहले ऑयली खाने से दिल का दौरा पड़ने की बात सुनी नहीं थी, लेकिन गैस ज्यादा होती थी। मीठा खाने से मधुमेह हुवा ऐसा सुनाई नहीं देता था, ज्यादा से ज्यादा दात दर्द होता था। व्यसन थे लेकिन किसी को भी कैंसर या लिव्हर खराब हुवा ऐसा सुनाई नहीं देता था। समय के साथ जैसे विकास होता गया वैसे बीमारियाँ बढती क्यों गयी? ध्यान देनें से पता चलता है कि जब तक श्रम कानून मजबूत थे, कर्मचारी सही समय पर घर आए, घर कंपनियों या कारखानों के करीब थे, मजदूरी अच्छी थी, महंगाई कम थी, बीमारियां इतनी नहीं बढ़ीं। तो ऐसा क्या हुवा के फार्मा कंपनियों और अस्पतालों का मुनाफा अत्यधिक बढ़ गया? पहले भी बीमारियाँ थी वे अपने प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता से ठीक हो जाते थी| ज्यादा कुछ हुवा तो डॉक्टर के पास जाना पड़ता था और वहां जाकर भी वे जल्दी ठीक हो जाते थे| बहुत कम बीमारी के लिए ऑपरेशन की नौबत आती थी तो...
गरीबी से सिर्फ अमीरी नहीं तो समृद्धि तक का सफ़र
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आपको आमिर होना है या समृद्ध होना है? दोनों के बीच एक अंतर है। अमीरी का मतलब है कि आपके पास ज्यादा से ज्यादा पैसा होना चाहिए। तो समृद्धि का मतलब है कि आप जिस स्थिति में रह रहे हैं, उससे ज्यादा पैसा आपके पास है, चाहे आप गरीब हों या अमीर, इसका मतलब है कि आप एक समृद्ध जीवन जी रहे हैं। हर आमिर व्यक्ति सकारात्मक नहीं होता लेकिन हर समृद्ध व्यक्ति सकारात्मक होता है। पैसा आता है और चला जाता है, लेकिन समृद्धि बनी रहती है। अमीरी का जीवन छोटा होता है जबकि समृद्धि का जीवन लंबा होता है। अमीर आदमी अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार भेदभाव कर सकता है, लेकिन समृद्ध आदमी भेदभाव नहीं करता, वह सम्मान करता है। अब एक सच्ची घटना पर आधारित एक उदाहरण देते हैं। यह 10 साल पहले हुआ था। आर्थिक समस्या का समाधान करने के लिए एक व्यक्ति मेरे पास आया। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बहुत गरीब लोग थे जहाँ घर पत्रे के बने होते थे। मित्र के मोबाइल पर मेरा लेख पढ़ने के बाद एक ने मुझसे संपर्क किया। वह महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाके से मजदूरी करने आया था। गरीब आदमी ने पैसा बचाना शुरू कर दिया, प्रति दिन का खर्चा, प्रति माह का ...