आजकल बीमारी का मुख्य कारण मानसिक है।
कैंसर बढ़ा, हृदय रोग बढ़ा, किडनी खराब हुई, बीपी बढ़ा, मधुमेह बढ़ा और डिप्रेशन सामान्य हो गया। इसका मुख्य कारण क्या है? जो भी आता है वह बोलता है कि ये वो खाने से बीमारी हुवी, कुछ न मिले तो उंगली उठाइए। समस्या की जद गयी कहा? पहले ऑयली खाने से दिल का दौरा पड़ने की बात सुनी नहीं थी, लेकिन गैस ज्यादा होती थी। मीठा खाने से मधुमेह हुवा ऐसा सुनाई नहीं देता था, ज्यादा से ज्यादा दात दर्द होता था। व्यसन थे लेकिन किसी को भी कैंसर या लिव्हर खराब हुवा ऐसा सुनाई नहीं देता था। समय के साथ जैसे विकास होता गया वैसे बीमारियाँ बढती क्यों गयी?
ध्यान देनें से पता चलता है कि जब तक श्रम कानून मजबूत थे, कर्मचारी सही समय पर घर आए, घर कंपनियों या कारखानों के करीब थे, मजदूरी अच्छी थी, महंगाई कम थी, बीमारियां इतनी नहीं बढ़ीं। तो ऐसा क्या हुवा के फार्मा कंपनियों और अस्पतालों का मुनाफा अत्यधिक बढ़ गया?
पहले भी बीमारियाँ थी वे अपने प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता से ठीक हो जाते थी| ज्यादा कुछ हुवा तो डॉक्टर के पास जाना पड़ता था और वहां जाकर भी वे जल्दी ठीक हो जाते थे| बहुत कम बीमारी के लिए ऑपरेशन की नौबत आती थी तो अभी प्रमाण इतना क्यों बढ़ गया|
अब आपको बीमारी का मूल कारण का पता चल गया होगा। नहीं समझा, ठीक है मै बताता हु।
मानसिक तनाव बढ़ा है। जितनी महंगाई बढ़ी है उतनी तनख्वाह भी नहीं बढ़ी, काम के घंटे बढ़ गए, काम के पास घर के दाम आसमान छू गए, विक्रोली से कोलाबा काम पर जाने वाले अब अंबरनाथ, बदलापुर से काम पर जाने लगे हैं, आने जाने का 4 घंटे का समय पकड़ो। पड़ोसी पहले एक साथ रहते थे, समय पे काम आते थे लेकिन उनके काम के घंटे भी बदल गए। एक सुबह काम जो जाता है तो दूसरा रात को। छुट्टी की गारंटी नहीं, छुट्टी के दिन भी काम को जाना पड़ता है|
खर्चे इतने बढ़ गए हैं कि काम करने के अलावा कोई चारा नहीं है। आपको जितना काम दिया जायेगा उतना काम करना ही होगा, नहीं तो दूसरी नौकरी मिलेगी या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसका मतलब है कि कोई आराम का समय उपलब्ध नहीं है। साधारण नींद पूरी नहीं होती, बाकी दूर रहते हैं।
महंगाई, काम में का मानसिक तनाव, घरखर्च, डॉक्टर, अस्पताल का खर्चा, जिन्दगी में किसी की गारेंटी नहीं इस वजह से मानसिक तनाव नहीं होगा तो क्या होगा? इंसान कितना सहेगा? कुछ लोक मानसिक रूप से सक्षम होते हा, लेकिन सभी नहीं होते हैं। और अगर कहीं ज्यादती की तो मानसिक रूप से सक्षम व्यक्ति भी मानसिक तनाव में चला जाएगा ही ना?
पहले लोग घर में नाश्ता करते थे, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियोंने जीवन इतना व्यस्त कर दिया हैं कि किसी भी चीज के लिए समय नहीं है, जो कुछ भी खाया जा रहा है वह बाहर का खाया जा रहा है। अब जब मैं सुबह दूध लेने जाता हूं तो बेकरी में मां-बाप की भीड़ लग जाती है, जहां वे डिब्बा खोलकर इडली मेदू वड़े बिस्कुट आदि खाने को देते है|
इसका मतलब खुदके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए समय ही नहीं है, और ना ही परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने का समय बचा है। इस जीवन शैली ने क्या हासिल किया है? सिर्फ मानसिक और शारीरिक बीमारी? और न्यूनतम अस्पताल बिल क्या है? तो दस हजार अब मान लीजिए सामान्य वेतन बीस हजार है, लोग अस्पताल का बिल कहां से देंगे? अगर आपकी सैलरी २०,००० रुपये से ज्यादा है तो आप भाग्यशाली हैं।
पहले तनख्वाह कम थी लेकिन मन की शांति थी, अब तनख्वाह ज्यादा है और खर्चे उससे ज्यादा हैं, खर्चा पूरा कर सकते हो तो भी हो जाए तो मन की शांति नहीं है। कर्मचारियों के लिए कम वेतन और मालिक, निवेशको के लिए अधिक मुनांफा। काम भी ठेके पे होता है।
फिर कोई आकर कहेगा कि यह सब माया है, तुम यहाँ ध्यान मत देना, सब छोड़ो इत्यादि इत्यादि। लेकिन न्जिएँ का कैसे? क्या कहता है प्रकृति का नियम? जीवित रहने के लिए संघर्ष करे, तो वही करेंगे ना? या १३५ करोड़ लोग सब कुछ छोड़कर जंगल में, हिमालय में चले जाएंगे? इतनी बड़ी आबादी हो गयी तो क्या करेंगे? लोग भूखे रहेंगे तो विद्रोह करेंगे। कुछ नहीं हुवा तो आप पे ऊँगली उठाएँगे, आप ज्यादा कान करते है, आप व्यसन करते है वगैरा वगैरा। मूल समस्या झा है वही है ना?
मानसिक और मानसिक रोगों के लिए आज की जीवनशैली बहुत उपजाऊ है और यह इतनी उपजाऊ है कि छोटे बच्चों को भी मानसिक और शारीरिक बीमारियां होने लगती हैं।
इसपे उपाय एक ही है के आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर और फिर अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें, भले ही आपका वेतन कम हो। आपको आपका वक्त मिलना ही चाहिए| जब आप मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं, तो आप नए नए कल्पनाओ का उपयोग करके अधिक पैसा कमा सकते हो। अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर सकते हो। सब कुछ संभव है सिर्फ आपका मानसिक स्वास्थ्य बना रहना चाहिए।
खुद पे विश्वास रखे, आप कर सकते हो। आप अपना जीवन बदल सकते हो। ध्यान करो, मन की शांति के लिए जो भी आवश्यक हो वह करो। वह करो जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। अगर कुछ और मदद चाहिए तो मैं आपके साथ हूं। परामर्श, उपचार और कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं। चिंता न करें, अपने लिए जीना सीखें।
धन्यवाद
अश्विनीकुमार

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