गरीबी से सिर्फ अमीरी नहीं तो समृद्धि तक का सफ़र

 



आपको आमिर होना है या समृद्ध होना है? दोनों के बीच एक अंतर है। अमीरी का मतलब है कि आपके पास ज्यादा से ज्यादा पैसा होना चाहिए। तो समृद्धि का मतलब है कि आप जिस स्थिति में रह रहे हैं, उससे ज्यादा पैसा आपके पास है, चाहे आप गरीब हों या अमीर, इसका मतलब है कि आप एक समृद्ध जीवन जी रहे हैं। हर आमिर व्यक्ति सकारात्मक नहीं होता लेकिन हर समृद्ध व्यक्ति सकारात्मक होता है। पैसा आता है और चला जाता है, लेकिन समृद्धि बनी रहती है। अमीरी का जीवन छोटा होता है जबकि समृद्धि का जीवन लंबा होता है। अमीर आदमी अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार भेदभाव कर सकता है, लेकिन समृद्ध आदमी भेदभाव नहीं करता, वह सम्मान करता है।


अब एक सच्ची घटना पर आधारित एक उदाहरण देते हैं।


यह 10 साल पहले हुआ था। आर्थिक समस्या का समाधान करने के लिए एक व्यक्ति मेरे पास आया। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बहुत गरीब लोग थे जहाँ घर पत्रे के बने होते थे। मित्र के मोबाइल पर मेरा लेख पढ़ने के बाद एक ने मुझसे संपर्क किया। वह महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाके से मजदूरी करने आया था।


गरीब आदमी ने पैसा बचाना शुरू कर दिया, प्रति दिन का खर्चा, प्रति माह का खर्चा, बुनियादी जरूरतें पूरी होने लगी, एक साल में उसने बुनियादी जरूरतों के लिए २ साल के लिए पर्याप्त पैसा अलग रखा और यहीं से उसका जीवन बदलने लगा।


जो लोग अमीर परिवार में पैदा होते हैं उन्हें शून्य से कुछ भी नहीं बनाना पड़ता है, उन्हें जीवन में कम जोखिम उठाना पड़ता है। जो है वही संभालना पड़ता है| उनको सिर्फ प्रोस्ताहित करनवाले लोग ही मिलते है, कल असफल होने पर भी वे सड़क पर नहीं आते हैं, इसलिए नुकसान झेलने के बाद भी वे आराम से आगे प्रयास करते रहते हैं। लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के साथ ऐसा नहीं है, एक आर्थिक गलती अगली ७ पीढ़ियों को कर्ज में डुबो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग समृद्ध जीवन नहीं जी सकता, इसके लिए भी एक समाधान हैं।


यदि आप जानते हैं कि अगले २ वर्षों के लिए आपके पास अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा है, इस वजह से आप निश्चिंत हो जाते हैं क्योंकि मन, मस्तिष्क और अंतर्ज्ञान को बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि हम जीवित रह सकें। निसर्ग बोलो, या भगवान इन्होने सुप्त अवचेतन मन नमी ऐसी प्रोग्रामिंग करके रखी है।


निश्चिंत हुवा मस्तिष्क आत्म-विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। वह आपके भीतर छिपी शक्तियों को जगा सकता है। आप अपने लक्ष्यों और सपनों को पूरा करने के काम को लग जाता हैं, आप हर पल अति सूक्ष्म निरीक्षण करते हैं और अवसर को पकड़ लेते हैं, यदि कोई अवसर नहीं है तो निर्माण करते है, पेट भरा हुवा होने के कारण रात में घर जाने के बाद भी भोजन की कोई कमी नहीं इस वजह से आप पूरी क्षमता के साथ दिन जीते हो। ज्यादा से ज्यादा लक्ष और सपने की पूर्ति की ओर बढ़ते जाते हो, आप समग्र रूप से खुदको विकसित करते हो|


यहाँ से आहे मेरे शिष्य की प्रगति होना शुरू हो गया, सही लोगों के साथ संपर्क होने लगा, जो मिले वो काम करने लगा, इस वजह से इतने सारे व्यावसायिक क्षेत्रों का अनुभव लिया के किसी एक को चुनना आसान था। एक क्षेत्र चुना और आगे बढ़ें। भाग्य का पहिया प्रगति की दिशा से घुमने लगा। सकारात्मक मानसिकता पहले ही बन चुकी थी  और साथ समृद्धि आने लगी।


अब अगले २ साल तक मध्यम वर्ग का जीवन जी सकते है इतना पर्याप्त धन जमा हुवा, जीवन शैली बढ़ी, लेकिन इस जीवन शैली में दिखावटी जीवन शैली नहीं थी, ऋण केवल मूलभूत आवश्यकताओं जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन के लिए लिया गया| बाकी मोबाइल से लेकर जो कुछ नकद मे ले सकते है वो लिया गया। वह शून्य प्रतिशत ब्याज पर १०,००० रुपये के बजाय ३०,००० रुपये का मोबाइल फोन नहीं खरीदा।


ऐसा करके उन्होंने अगले ५ वर्षों तक उच्च मध्यम वर्ग का जीवन जीने के लिए पर्याप्त धन बचा लिया और उसके बाद शुरू हुई अमीरी की यात्रा जारी है। अब महंगी कार सिर्फ काम के लिए है, मैंने उससे कहा कि जहां वित्तीय लेनदेन बढ़ गया है, आपको लोगों को काम पे रखना होगा, यात्रा में आराम देने के लिए महंगी कार की जरूरत है ताकि आप आरामदायक मीटिंग कर सकें। अब ऐश आराम मन की शांति के लिए है ना कि दिखावे के लिए।


यहाँ कुछ सबसे अमीर शिष्यों का सिर्फ एक उदाहरण है। बाकी गरीब हैं लेकिन उनके पास इतना पैसा है कि कुछ सालों तक आराम में गिरीबी में जी सकते है, कुछ ने मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग में छलांग लगा दी है। इसे समृद्धि कहा जाता है, न कि केवल अमीरी।


समृद्धि लंबे समय तक चलती है, जबकि अमीरी थोड़े समय के लिए रहता है। समृद्धि समग्र समृद्धि की ओर ले जाती है जबकि अमीरी केवल आर्थिक रूप से आगे बढ़ती है। आप एक समृद्ध जीवन जीना हैं ना की सिर्फ अमीर जीवन। अब आप तय करें, जीवन आपका है और आप ही जिम्मेदार हैं।


धन्यवाद

अश्विनीकुमार

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