एक सकारात्मक विचार आपके जीवन को कैसे बदल देता है?

 


क्या आपको अभी कोई समस्या है? यदि हां, तो इसके बारे में सकारात्मक सोचें और यदि नहीं, तो आपका लक्ष्य क्या है? फिर सकारात्मक रूप से सोचें कि वह लक्ष्य कैसे प्राप्त हुआ। लक्ष्य ना हो तो सपनों को पूरा करना ही होगा ना? फिर उस सपने को पूरा करने के बारे में सकारात्मक सोचें।


मैं आपको एक उदाहरण देता हूं।


मान लीजिए आप किसी बीमारी से ग्रस्त है। अब इस बीमारी को ठीक करना चाहते हो। आप सोचेंगे कि आप स्वस्थ हैं। आप लगातार यह विचार करोगे, जिससे इन विचारों की संख्या में वृद्धि होगी। सुप्त मन का नियम यह है एखाद दूसरा विचार सुप्त मन में बोया जाता है, तो आपके द्वारा किए गए सकारात्मक विचार कहां जाएंगे? वे सुप्त मन में जाएंगे।


अब अगर स्वस्थ का विचार अचेत मन में बो दिया, तो अचेत मन स्वचालित रूप से काम करेगा, आपको लगातार सोचने के लिए कड़ी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। यह आपके द्वारा स्वचालित रूप से किया जाएगा। यहीं से स्वस्थ विचारों का प्रवाह पूरे शरीर में होने लगता है। हृदय तक पहुंच जाएगा।


स्वस्थ सोच अब सिर्फ एक विचार नहीं है, यह वह एहसास है जिसे आप महसूस करेंगे। हृदय भावनाओं के स्तर पर काम करता है। जब भावनाएं पैदा होती हैं, तो उन्हें पूरे शरीर में महसूस किया जाता है, आपको तंदुरूस्ती महसूस करनी होती है और वह तंदुरुस्ती पूरे शरीर में फैल जाती है। शरीर की हर कोशिका में बो दिया जाता है।


कोशिकाएँ इन कंपनों के स्तर पर कार्य करती हैं। इन कोशिकाओं में हृदय एक स्वस्थ भावना का विकास करता है और फिर कोशिकाए स्वस्थ रूप से कंपन करने लगती हैं। और यहाँ बीमारियाँ ठीक होने लगती हैं। क्योंकि हमारा शरीर कोशिकाओं से बना है।


अब आप जानते हैं कि कैसे सिर्फ एक सकारात्मक विचार आपके जीवन को बदल सकता है। यहां आप बीमारी को आर्थिक जीवन, निजी जीवन, सामाजिक जीवन या जो भी समस्याएं हैं या जो भी लक्ष्य आप प्राप्त करना चाहते हैं, से बदल सकते हैं और आप अपने जीवन को आराम से बदल सकते हैं। यह बहुत सरल है।


हम आप से जल्द ही अभिप्राय की अपेक्षा रखते है।


धन्यवाद

अश्विनीकुमार

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